इंस्टीट्यूट रैंकिंग 2017: बी– स्कूलों के लिए इंडस्ट्री अनुभव की व्याख्या

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भारत में बी– स्कूलों की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला एक गुप्त मंत्र है, प्रबंधन संस्थानों को अपने संबंधित डोमेन/ विषय क्षेत्र में इंडस्ट्री के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाने की क्षमता. वास्तव में एमबीए इंस्टीट्यूट्स की समग्र प्रतिष्ठा और ब्रांड में बी– स्कूलों के बारे में इंडस्ट्री का अनुभव बहुत बड़ी भूमिका निभाता है. एकेडमिक विशेषज्ञ अक्सर इसे नजरअंदाज कर देते हैं. हमने इंस्टीट्यूट रैंकिंग 2017 सर्वे में इंडस्ट्री अनुभव को महत्वपूर्ण पहलू के तौर पर शामिल किया है. इसके लिए, हमने शॉर्टलिस्ट किए गए बी–स्कूलों में प्लेसमेंट ड्राइव में हिस्सा लेने वाली अलग– अलग कंपनियों के एचआर कर्मियों से बातचीत की. उन्होंने बी– स्कूलों के बारे में इंडस्ट्री के अनुभव पर हावी होने वाले कारकों के बारे में हमसे कुछ बहुमूल्य बातें साझा कीं.

छात्रों के सॉफ्ट स्किल्स

आज के वैश्वीकरण युग में किसी के भी व्यक्तिगत सफलता, किसी कंपनी की सफलता या यहां तक कि किसी इंडस्ट्री की सफलता में सॉफ्ट स्किल्स की निर्णायक भूमिका होती हैं.  अतः एक बी– स्कूल के बारे में इंडस्ट्री के अनुभवों को प्रभावित करने वाले सबसे प्रमुख कारक के तौर पर 'छात्रों की सॉफ्ट स्किल्स' का सामने आना आश्चर्य की बात नहीं है. सभी वित्तीय उपकरणों और प्रबंधकीय कौशलों के बावजूद, यदि एमबीए ग्रेजुएट्स को संचार के मूल कौशल का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता तो इससे साफ पता चलता है कि इंस्टीट्यूट ने बहुत महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान नहीं दिया है.

छात्रों की समग्र गुणवत्ता

भारत में बी– स्कूलों के बारे में हमसे बात करने के दौरान कई एचआर मैनेजरों ने छात्रों की गुणवत्ता के बारे में बात की. एक व्यापक स्पेक्ट्रम मैट्रिक्स होने के नाते उन्होंने विशेष जानकारी दी जैसे कि प्रबंधन के सैद्धांतिक और प्रायोगिक दोनों ही पहलुओं की अच्छी जानकारी, वित्तीय सिद्धांतों पर मजबूत पकड़ और नेतृत्व करने के गुण जैसे कारक छात्रों के समग्र गुणवत्ता को आकार देते हैं.

इंडस्ट्री इंटरफेस की गुणवत्ता

हालांकि भारत में इसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है लेकिन जब बात बी– स्कूलों के वर्गीकरण की हो तो इंडस्ट्री इंटरफेस महत्वपूर्ण डिफरेन्शीएटर (अवकलक) माना जाता है. एमबीए इंस्टीट्यूट्स द्वारा कराए जाने वाले गेस्ट लेक्चर्स (अतिथि व्याख्यान) और इंडस्ट्री इटरैक्शन के अलावा इंडस्ट्री इंटरफेस कई अन्य पहलुओं को भी कवर करता है जैसे संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, फील्ड केसेज और ओपन मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम्स. ये सभी संबंधित इंडस्ट्री विषयों के सहयोग से कराए जाते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो इंडस्ट्री इंटरफेस बी– स्कूल के बौद्धिक पूंजी को दर्शाता है. यह एक ऐसा पहलू है जिसमें भारत के बड़े बी– स्कूल भी अच्छा अंक लाने में विफल रहे हैं.

छात्रों का इंडस्ट्री अनुभव (एक्सपोजर)

हम जिस प्रतिस्पर्धी माहौल में जी रहे हैं उसका मतलब है कि कैंपस से पास होकर बाहर निकलने वाले एमबीए ग्रेजुएट्स के पास नौकरी लगने के बाद अपने हनीमून पीरियड का लुत्फ उठाने की आजादी नहीं है. उन्हें पहले दिन से ही काफी जिम्मेदारियां निभानी होती है. इसलिए, इंडस्ट्री के विशेषज्ञ ऐसे छात्रों की तलाश में होते हैं जो नौकरी करने के लिए बिल्कुल तैयार हों और जिन्हें इंडस्ट्री का कुछ अनुभव (एक्सपोशर) हो. बी– स्कूलों द्वारा कराए जाने वाले इंटर्नशिप प्रोग्राम, समर प्रोजेक्ट्स और ऐसी ही अन्य प्रशिक्षिण कार्य,छात्रों के पास उनके सीखने के माहौल के हिस्से के तौर पर इंडस्ट्री अनुभव (एक्सपोशर) भी है, को सुनिश्चित करने में काफी मदद करते हैं.

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