पश्चिम भारत में एमबीए शिक्षा की तस्वीर

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पश्चिम भारत के बारे में सोचने पर प्रमुख औद्योगिक स्थल, विशालकाय समुद्री बंदरगाह और अत्यंत शहरीकृत केंद्रों की तस्वीर दिमाग में आती है. यह कल्पना सामूहिक रूप से पश्चिम भारत की पहचान बनाने वाले तीन राज्यों यानि गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा तक उड़ान भरती हैं. यह बात इन क्षेत्रों की समृद्धि और इनके आर्थिक विकास की जबरदस्त संभावनाओं की गवाही देता है. हालांकि आर्थिक विकास अक्सर संपन्न शिक्षा प्रणाली, विशेष तौर पर प्रबंधन प्रशिक्षण के नेतृत्व में उच्च शिक्षा प्रणाली, का एक उप– उत्पाद है. इसलिए, एमबीए प्रत्याशियों के पसंदीदा गंतव्य स्थल के रूप में पश्चिम भारत का नाम सामने आता है .

आईआईएम अहमदाबाद के विरासती कैंपस की वास्तुकला में लाल पत्थरों और कोणीय ज्यामितिक आकार की प्रमुखता दिखाई देती हैं . जब बात एमबीए शिक्षा की हो तो यह प्रतिभा का पर्याय बन जाता है. वास्तव में पश्चिम भारत के बी– स्कूलों ने दूसरों के लिए नए मानक स्थापित किए हैं. प्रतिष्ठित आईआईएम अहमदाबाद– जो भारत के पहले प्रबंधन संस्थानों में से एक है, से शुरु करते हुए वीस्कूल (WeSchool) तक, ये पश्चिम भारत के सभी बी– स्कूल इलाके में मैनेजमेंट एजुकेशन के क्षेत्र में नेतृत्व करते हैं. ये संस्थान दूसरों के लिए उत्कृष्टता के मानक बन गए हैं.

ऐसे में जब कुछ संस्थानों ने पहले ही अपनी पहचान स्थापित कर ली है, खुद को आगे बढ़ाने में लगे हैं. कई नए मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट भी हैं जो एमबीए कोर्सेज में उत्कृष्टता हासिल करने की दौड़ में शामिल हो गए हैं. ग्लोबल आउटलुक (वैश्विक परिदृश्य), नई प्रोग्राम संरचना, विशिष्ट शिक्षण पद्धति और उत्कृष्टता प्राप्त करने की अतुलनीय प्रतिबद्धता के साथ श्री बालाजी सोसायटी मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट तथा द बिजनेस इंडिया बी– स्कूल जैसे इंस्टीट्यूट आदि इस क्षेत्र में मैनेजमेंट एजुकेशन की नई लहर का नेतृत्व कर रहे हैं.

पश्चिम भारत में इन नए बिजनेस स्कूलों को महत्वपूर्ण बनाने वाला मुख्य कारक उनका इंडस्ट्री इंटरफेस है. भारत भर के ज्यादातर बी– स्कूलों में इंडस्ट्री इंटरफेस के प्रमुख घटकों के तौर पर सिर्फ गेस्ट लेक्चर्स और सेमिनारों पर जोर दिया जाता है. जबकि पश्चिम भारत के मैनेजमेंट स्कूलों ने  इससे आगे बढ़ कर नए मानकों को स्वीकार किया है. मानकों के अनुसार इसमें रिसर्च प्रोजेक्ट्स, फील्ड केस स्टडीज, लाइव केस स्टडीज और ओपन मैनेजमेंट डेवलपमेंट प्रोग्राम्स (एमडीपी) शामिल किया जाएगा. इससे छात्रों को न सिर्फ अनिवार्य इंडस्ट्री अनुभव मिलेगा बल्कि वे मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट्स के बौद्धिक संपदा को भी समृद्ध करेंगे.

इसलिए, पश्चिम भारत में मैनेजमेंट एजुकेशन की स्थिति प्रत्याशियों को सुनहरा अवसर प्रदान करने वाली है l गौरतलब है कि नियोक्ता भी प्रतिभाशाली मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स की तलाश में हैं.

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