भारत में एमबीए की शिक्षा: आगे का रास्ता

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पिछले दो दशकों में भारत में एमबीए की शिक्षा का काफी विस्तार हुआ है l वैश्विक स्तरीय शिक्षा प्रदान करने वाले कुछ मुट्ठी भर प्रबंधन संस्थानों में आईआईएम जैसे देश के कुछ प्राइवेट प्रबंधन संस्थान ही राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हैं l किन्तु एक गतिशील क्षेत्र होने के कारण इस क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाये जाने की आवश्यक्ता है ताकि एमबीए की शिक्षा के भविष्य को और उज्ज्वल बनाया जा सके l 

भारत में एमबीए क्यों ?

इस समबन्ध में सबसे पहली बात जिसका मूल्याङ्कन करना है वह है इसका मुख्य उद्देश्य, जो एमबीए को अपने करियर के विकल्प के रूप में प्राथमिकता देने की लिए प्रोत्साहित करता है l

पारंपरिक रूप से छात्रों के लिए उपलब्ध श्रेष्ठ करियर विकल्प के रूप में एमबीए को कार्पोरेट के क्षेत्र में विकास करने के क्रम में मुख्य अस्त्र की तरह देखा जाता है। यह अब भी एमबीए के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का मुख्य स्त्रोत है लेकिन आजकल छात्र इसके अतिरिक्त अन्य दूसरे लक्ष्यों की तरफ भी रुख करने लगे हैं l किसी भी संस्था के चुनाव में सिर्फ उसके जरिये मिलने वाली नौकरियां एवं आंकड़े ही पर्याप्त नहीं हैं बल्कि छात्रों का तीव्र करियर ग्रोथ, स्वयं के साथ-साथ संस्था के स्तर पर कुशलता में बढ़ोतरी एवं प्रभावपूर्ण गुणों के साथ विश्व व्यापार में उनके पदार्पण के लिए एक सही मंच की उपलब्धता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए । एक अन्य रोचक बात जो आजकल एमबीए अभ्यर्थियों द्वारा विशेष रूप से ध्यान में रखा जा रहा है वह है किसी भी प्रबंधन संस्थान द्वारा गत 5 वर्ष से 10 वर्ष के दौरान उतीर्ण होकर निकले छात्रों की सफलता के अनुपात को देखा जाना l ये सभी तथ्य एमबीए के कॉलेज के चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं l

एमबीए के पश्चात् करियर की संभावनाएं

वैश्विक अर्थव्यवस्था में उतार जैसी चुनौतियों के बावजूद भी भारत में प्रबंधन की शिक्षा ने छात्रों को उद्योगों के तात्कालिक जरूरतों के मुताबिक ढ़ालने एवं विकसित करने में सफलता हासिल की है l अभी भी पारंपरिक पेशे जैसे निवेश बैंकिंग, प्रबंध सलाहकार एवं वित्तीय विश्लेषक की काफी मांग है l लेकिन कुछ नए व्यवसाय भी हैं जो एमबीए स्नातकों के लिए एक सफल करियर की सम्भावना के रूप में उभरे हैं l जैसे, लक्जरी मैनेजमेंट अथवा फैशन एवं अपेरल जो पारंपरिक रूप से क्रिएटिव एजेंसी द्वारा चलाये जाते हैं l अब कंपनियां अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए ज्यादातर मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स की तलाश करने लगी हैं l इसी प्रकार इवेंट मैनेजमेंट भी एक आकर्षक एवं समृद्ध करियर विकल्प के रूप में उभरा है l वस्तुतः प्रबंधन किसी भी क्षेत्र या संस्था के सफल संचालन में एक अहम रोल निभाता है l इसलिए एमबीए ग्रेजुएट्स  के लिए करियर की संभावनाएं उनके कौशल,रूचि एवं कल्पना पर पूरी तरह से आधारित है l

रोजगार का अनुपात

भारत में एमबीए की शिक्षा के सम्बन्ध में सबसे महत्त्वपूर्ण पक्षों में से एक है, रोजगार का अनुपात।

सामान्य परिभाषा के अनुसार, रोजगार की योग्यता, एक रोजगार देने वाले के द्वारा स्वीकार्य उत्पादन के स्तर पर निर्धारित कार्य को करने की योग्यता को दर्शाता है । वर्तमान समय में प्रबंधन की शिक्षा के स्तर तथा इसकी गुणवत्ता को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि हामरे देश में एमबीए का पाठ्यक्रम तथा प्रशिक्षण पद्धति ग्लोबल स्टैण्डर्ड (वैश्विक स्तरीय) के अनुरूप है l इससे यह सपष्ट होता है कि भारतीय मैनेजमेंट ग्रेजुएट्स किसी भी रूप में अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम पढ़े-लिखे अथवा कम प्रशिक्षित नहीं हैं l वह पक्ष जहां भारतीय प्रबंधन संस्थान पिछड़ जाते हैं वह है इंडस्ट्री एक्सपोजर तथा इंडस्ट्री इंटरफेस l ऐसे संस्थान जहां इंडस्ट्री एक्सपोजर तथा इंडस्ट्री इंटरफेस पर अत्यधिक जोर दिया जाता है, वहां के छात्र अत्यधिक सफलता अर्जित करते हैं l उनकी यह सफलता क्षणिक नहीं होती बल्कि वे अपने जीवन में सतत व्यावसायिक सफलता हासिल करते हैं l

अतः भारत में प्रबंधन की शिक्षा के अगले पड़ाव के रूप में ऐसी शिक्षा पर बल दिया जाना चाहिए जो अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित रख सकें तथा उन्हें आने वाली चुनौतियों का सामना करने योग्य बना सकें l

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