एसआरएम - विश्व को प्रेरित करने वाले स्कॉलर की कर्म भूमि

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एसआरएम यूनिवर्सिटी– जहां आपको बुलंदियों को छूने की आजादी है:

एसआरएम यूनिवर्सिटी समृद्ध शैक्षणिक माहौल में सीखने के व्यापक एवं समग्र अनुभव प्रदान करने के केंद्र के तौर पर उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले अन्य यूनिवर्सिटीज के मुकाबले खुद को अलग बनाता है. एसआरएम यूनिवर्सिटी के संस्थानों में 40,000 से अधिक छात्र ज्ञान और व्यक्तित्व विकास की प्रक्रिया में लगे हैं और ये सभी एसआरएम इंस्टीट्यूशंस (संस्थानों) के शिक्षाप्रद पोर्टल से विद्वान, प्रबंधक, राष्ट्रीय एवं वैश्विक नेता, विचारक और प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में दुनिया में हर जगह अपना सर्वाधिक योगदान दे रहें हैं l

वर्ष 2002 में एसआरएम यूनिवर्सिटी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिला था. इसकी नींव एसआरएम ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस द्वारा तीन दशकों से दी जाने वाली शिक्षा के अमूल्य विरासत और संस्थापक– कुलपति डॉ. टी. आर. पारीवेन्धर के विजन को पूरा करने के उद्देश्य से रखी गयी .

भारत के विभिन्न हिस्सों समेत पचास से भी अधिक राष्ट्रों के छात्र और विश्व के विभिन्न हिस्सों से आए एनआरआई छात्र असंख्य विषयों पर मूल्यवान शिक्षा प्राप्त करते हैं l  वे अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के लाभों का भी भरपूर उपयोग करते हैं l एक विशेषक्ष शिक्षक द्वारा उन्हे सलाह भी दी जाती है. इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी पर मुख्य फोकस के साथ एसआरएम यूनिवर्सिटी कई प्रकार के विषयों में शिक्षा प्रदान करता है. इनमें मुख्य रूप से शामिल है– चिकित्सा, दंत चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान, प्रबंधन, शुद्ध विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, मानविकी और विधि.

एसआरएम ब्रांड एक दिन में नहीं बना था. शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रमुख ब्रांड के तौर पर एसआरएम का विकास गहन चिंतन और सफलता की योजना से उपजा है जो किताबों, परीक्षाओं और डिग्रियों के परे है. भविष्योन्मुख विजन और प्रबंधन एवं प्रशासन का मिशनरी उत्साह एसआरएम ब्रांड के अद्भुत सफलता का राज है. शैक्षिक प्रयासों के पीछे यह दृढ़ विश्वास था कि छात्रों को सैद्धांतिक ज्ञान का प्रयोग प्रायोगिक परिस्थितियों और विश्व की मांग के अनुसार करना चाहिए ।

प्रोफेसर प्रबीर के. बाग्ची, एसआरएम यूनिवर्सिटी के उपकुलपति ने मेगा शैक्षणिक उद्यम को संचालित करने के अपने मंत्र का खुलासा करते हुए कहा कि, " मैं तीन आर (अंग्रेजी वर्णमाला का अक्षर– R) पर जोर देता हूं– सावधानी/ सख्ती (रीगर), प्रासंगिकता (रेलिवेंस) और अनुसंधान (रिसर्च ), ये तीनों छात्र को सफलता दिलाने में बेहद महत्वपूर्ण हैं। " मई 2015 में यूनिवर्सिटी के प्रमुख का पद संभालने का जिम्मा डॉ. बाग्ची के हाथों में आया और तभी से तीन आर (R) पर बहुत फोकस किया गया है.

वर्ष 2002 में एसआरएम यूनिवर्सिटी ने रिसर्च के क्षेत्र में वांछनीय रिकॉर्ड बनाया, खासकर प्रकाशन, उत्पादकता और सरकार और निजी निकायों से प्राप्त वित्त के संदर्भ में. वर्ष 2011 में प्रोजेक्ट आउटलेज (परियोजना परिव्यय) के लिए सिर्फ 2.16 करोड़ रुपयों से वर्ष 2015 तक वित्तपोषण में काफी बढ़ोतरी हुई और यह 25 करोड़ रुपयों से अधिक का हो गया. अनुसंधान के क्षेत्रों में अक्षय ऊर्जा, सामग्री विज्ञान, सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वास्थ्य विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी), स्टेम सेल बायोलॉजी और टिश्यू इंजीनियरिंग एवं कई अन्य विषय भी शामिल हैं.

बीते दो वर्षों के दौरान, 3.86. के औसत प्रभावी  कारक के साथ 96 शोधपत्र प्रकाशित हो चुके हैं. रिसर्च इंस्टीट्यूट को कुल 3.93 करोड़ रुपयों के परिव्यय की अनुसंधान परियोजनाएं प्राप्त हुईं हैं. परियोजनाओं को डीएसटी, डीबीटी, आईसीएमआर, डीआरडीओ और डीएसटी– नैनो मिशन से मंजूरी मिली है.

यह गर्व की बात है कि इस यूनिवर्सिटी को नैक (एनएएसी) ने ग्रेड ए में और मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने इसे श्रेणी ए में स्थान दिया है. एबीईटी के इंजीनियरिंग प्रमाणन आयोग ने सिविल, मैकनिकल, ईईई और ईसीई समेत चार अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम को मान्यता प्रदान की है और कंप्यूटिंग प्रमाणन आयोग ने सूचना प्रौद्योगिकी को मान्यता दी है. ये सभी प्रोग्राम कट्टनकुलाथुर कैंपस के हैं. गतिशील पाठ्यक्रम के अलावा, लगातार उन्नत बनाई जाने वाली बुनियादी संरचना और अनुभवी एवं समर्पित शिक्षकों ने एसआरएम यूनिवर्सिटी की एकेडमिक उत्कृष्टता और समृद्ध एवं विविधताओं से भरी संस्कृति में प्रमुख भूमिका निभाई है.

एसआरएम यूनिवर्सिटी ने 23 देशों में उच्च शिक्षा के 90 से अधिक संस्थानों के साथ भागीदारी की है. वर्ष 2004 से एसआरएम के 370 से भी अधिक छात्र 13 देशों के 32 यूनिवर्सिटीज में सेमेस्टर अब्रॉड प्रोग्राम से लाभान्वित हो चुके हैं. वर्ष 2010 से पांच देशों की सात यूनिवर्सिटीज में दोहरी डिग्री का लाभ 70 से अधिक छात्र ले चुके हैं.

एसआरएम यूनिवर्सिटी प्रतिस्पर्धी वैश्विक माहौल में खासकर वैश्वीकरण की चुनैतियों एवं आईटी क्षेत्र में लगातार होने वाली क्रांतियों के बीच खुद को सहजता के साथ आगे बनाए हुए है. इस उल्लेखनीय उपलब्धि को हासिल करने के लिए एसआरएम यूनिवर्सिटी के पास 215 लीडिंग कंपनियों और व्यापारिक घरानों के प्रख्यात अधिकारियों का एक कॉरपोरेट एडवाइजरी बोर्ड है. इसके पास एक इंटरनेशनल एडवाइजरी बोर्ड भी है जिसमें विश्व के नौ देशों के 50 से भी अधिक प्रख्यात विद्वान शामिल है. ये सभी पाठ्यक्रम, अनुसंधान एवं शिक्षण पद्धति को तैयार करने में हिस्सा लेते हैं.

सीखने के नए मॉड्ल के विकास के महत्व पर जोर देते हुए प्रो. बाग्ची ने फैकल्टी सबैटिकल (शिक्षक अध्ययन प्रोत्साहन अवकाश) देने की बात कही जो उन्हें प्राइवेट और पब्लिक में डिजाइन, विनिर्माण एवं व्यापार प्रबंधन कार्यों का अनुभव प्रदान करेगा. इस पहल से सीखने के लिए व्यावहारिक प्रासंगिकता लाने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि, " ऐसा अनुभव हमारे पाठ्यक्रम को समृद्ध बनाएगा और वास्तिवक जीवन को अधिक बारीकी से अनुकरण करेगा एवं हमारे पाठ्यक्रम के मूल्य को बढ़ाएगा."

एसआरएम का गौरव और सम्मान उनकी दूरदर्शिता और दुनिया में विचारशील भिन्नता लाने के लिए असाधारण चरित्र एवं नेतृत्व के साथ वैश्विक नागरिक विकसित करने के उद्यम से बढ़ा है.

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