दक्षिण भारत में मैनेजमेंट एजुकेशन का कायापलट

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पारंपरिक रूप से देश का एजुकेशन हब माने जाने वाला दक्षिण भारत मैनेजमेंट एजुकेशन के क्षेत्र में सबसे आगे रहा है. जब बात दक्षिण भारत में मैनेजमेंट एजुकेशन की हो रही हो,तब एकेडेमिक विशेषज्ञ दक्षिण भारत में बीते एक दशक के दौरान धीमी और स्थिर परिवर्तन प्रक्रिया के गवाह रहे हैं.

'विद्वानों की भूमि' के रूप में विख्यात दक्षिण भारत के चार राज्यों यानि तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश, में देश के कुछ सर्वश्रेष्ठ बी– स्कूल हैं. आईआईएम बैंगलोर और आईआईएम कोझीकोड़ से लेकर आईबीएस हैदराबाद और चेन्नई में एलआईबीए तक, इस इलाकें में बीते पांच दशकों से मैनेजमेंट एजुकेशन की जीवंत संस्कृति रही है. नवाचार (इन्नोवेशन) के प्रति प्रतिबद्धता दक्षिण भारत के बी– स्कूलों को दूसरों बी– स्कूलों से अलग करता है. देश के सबसे पुराने बी– स्कूलों में से एक आईआईएम बैंगलोर अभी भी छात्रों और इंडस्ट्री के समकालीन जरूरतों के लिहाज से अनुकूल अपने मैनेजमेंट प्रोग्राम्स के लिए छात्रों के बीच लोकप्रिय है. दक्षिण भारत में एमबीए कॉलेजों की यही विशेषता मैनेजमेंट एजुकेशन की पहचान बन गया है.

एसआरएम यूनिवर्सिटी जैसे प्राइवेट बी– स्कूलों ने भी दक्षिण भारत में मैनेजमेंट एजुकेशन के क्षेत्र में प्रोग्राम संरचना में नवीनता के साथ साथ कक्षा में दी जाने वाली शिक्षा और कौशल आधारित प्रायोगिक प्रशिक्षिण के बीच सही संतुलन बनाते हुए मैनेजमेंट एजुकेशन के लिए बेहतरीन विकल्प प्रदान किए हैं.

वास्तव में विश्व भर के कई विशेषज्ञों ने इस क्षेत्र के मैनेजमेंट एजुकेशन की ग्लोबल स्तर पर अनूठे शिक्षण पद्धति क्षमता को समझने का प्रयास किया है. एमबीए अक्सर छात्रों के लिए एक प्रमुख कोर्स होता है तथा निवेश पर आय (आरओआई) कुछ ऐसा है जिसे प्राइवेट बी– स्कूलों के प्रदर्शन के मूल्यांकन के दौरान स्पष्ट रूप से मापा जाता है. एसआरएम यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में दक्षिण भारत में कई प्राइवेट मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट्स ने बेहतरीन प्लेसमेंट अवसरों की मदद से अपनी विश्वसनीयता अर्जित की है. साथ ही उन्हें इस संदर्भ में सत्यापित सांख्यिकीय आंकड़ों की मदद से अपने दावों पर समर्थन भी प्राप्त हुआ है.

 वस्तुतः दक्षिण भारत में मैनेजमेंट एजुकेशन के क्षेत्र में स्थिर रूप से प्रभावी कायापलट हुआ है.

नई रणनीतियों और अभिनव उपायों का परंपरागत पद्धतियों के साथ मेल एमबीए कोर्सेज को नई दिशा में आकार दे रहा है. आशा है जल्द ही यह रुझान पूरे देश में फैलेगा और भारत में मैनेजमेंट एजुकेशन के अगले चरण हेतु एक नवीन  मार्ग प्रशस्त करेगा.

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